अवैध रेत उत्खनन की कार्रवाई के दौरान वन विभाग की टीम से विवाद, वाहन छुड़ाकर ले जाने और अभद्रता का आरोप

मरवाही वनमंडल के अंतर्गत लालपुर क्षेत्र में अवैध रेत उत्खनन की रोकथाम के लिए गई वन विभाग की टीम के साथ विवाद और शासकीय कार्य में बाधा डालने का मामला सामने आया है। वन विभाग ने कई लोगों पर कर्मचारियों के साथ अभद्रता, गाली-गलौज, धमकी देने और कार्रवाई के दौरान वाहन को बलपूर्वक छुड़ाकर ले जाने का आरोप लगाया है।

वन विभाग की ओर से दिए गए प्रतिवेदन के मुताबिक, 18 सितंबर 2026 की सुबह करीब 7:20 बजे उपवनमंडलाधिकारी गौरेला के नेतृत्व में वन अमला सर्किल लालपुर के अंधियारखोह परिसर के अंतर्गत आरेंज एरिया हर्री खसरा नंबर 109 और 106 से लगे नाले का निरीक्षण करने पहुंचा था। विभाग के अनुसार, मौके पर दो ट्रैक्टर अवैध उत्खनन के लिए पहुंचे हुए मिले।

वन अमले ने नाले से निकल रहे दो ट्रैक्टरों को हर्री के बैगनटोला में पुरन पनिका के घर के पास रोककर जांच शुरू की। विभाग के अनुसार, एक ट्रैक्टर में छह नग बांस करील पाए गए, जिनकी मौके पर तस्वीरें भी ली गईं।

 

वन विभाग का आरोप है कि कार्रवाई के दौरान कुछ लोगों ने ट्रैक्टर-ट्रॉली पर चढ़कर जबरदस्ती बांस करील नीचे फेंक दिया और विभागीय कार्रवाई में हस्तक्षेप किया। इसके बाद स्थिति बिगड़ने पर कर्मचारियों को वाहन से वापस लाया जा रहा था।

 

विभाग के प्रतिवेदन में आरोप लगाया गया है कि ट्रैक्टर मालिकों ने हर्री स्टेशन रोड पर वाहन को रोककर कर्मचारियों के साथ गाली-गलौज और अभद्रता की तथा धमकी देते हुए वाहन को वहां से ले जाने में बाधा पहुंचाई। इसके बाद अंडरब्रिज लालपुर के पास भी कुछ लोगों द्वारा शासकीय वाहन को रोककर विवाद करने का आरोप लगाया गया है।

वन विभाग ने पूरे मामले को शासकीय कार्य में बाधा डालने और कर्मचारियों के साथ अभद्र व्यवहार से जुड़ा गंभीर मामला बताते हुए संबंधित लोगों के खिलाफ कठोर पुलिस कार्रवाई की मांग की है।

 

ट्रैक्टर मालिकों ने भी लगाए आरोप

 

वहीं दूसरी ओर, ट्रैक्टर मालिकों की ओर से वन विभाग की टीम पर पैसे लेकर रेत से भरी गाड़ियों को छोड़ने और कार्रवाई नहीं करने जैसे आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, इन आरोपों को वन परिक्षेत्र अधिकारी ज्योत्सना पांडे ने झूठा और मनगढ़ंत बताया है।

 

वन विभाग का कहना है कि टीम नियमानुसार अवैध उत्खनन की रोकथाम के लिए कार्रवाई कर रही थी। वहीं पूरे घटनाक्रम में दोनों पक्षों की ओर से अलग-अलग आरोप सामने आने के बाद अब पुलिस जांच से ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।

 

फिलहाल वन विभाग द्वारा दिए गए प्रतिवेदन के आधार पर पुलिस से संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।

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