में शाला त्यागी बच्चों को एक बार फिर शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए जिला प्रशासन की पहल रंग ला रही है। कलेक्टर विजय दयाराम के. के मार्गदर्शन में चलाए जा रहे अभियान के तहत घर-घर पहुंचकर बच्चों और उनके पालकों को शिक्षा के महत्व के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
यूनिसेफ की जिला समन्वयक सरस्वती यादव द्वारा शाला त्यागी बच्चों की पहचान कर उनके घरों में संपर्क किया गया। लगातार समझाइश और जागरूकता के सकारात्मक परिणामस्वरूप पांच बच्चों ने पुनः विद्यालय में प्रवेश लेकर पढ़ाई शुरू कर दी है।
ग्राम गोर्राटिकरा की दिलेश कुमारी और ललिता, लिखन टोला की सुमन तथा देवराज पारा के प्रीतम सिंह और राहुल सिंह ने शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय नेवसा में दोबारा प्रवेश लिया है। अब ये बच्चे नियमित रूप से विद्यालय पहुंचकर अपनी पढ़ाई जारी रख रहे हैं।
इस अवसर पर बच्चों को स्कूल बैग वितरित कर नियमित रूप से विद्यालय आने और मन लगाकर पढ़ाई करने के लिए प्रेरित किया गया। अभियान के दौरान विशेष रूप से बालिका शिक्षा के महत्व पर जोर देते हुए बच्चों और पालकों को जागरूक किया जा रहा है।
जिले में जिला प्रशासन, शिक्षा विभाग और यूनिसेफ के संयुक्त प्रयास से 100 माध्यमिक, हाई और हायर सेकेंडरी स्कूलों में बालिका शिक्षा कार्यक्रम भी संचालित किया जा रहा है। इसके तहत बालिकाओं में लिंग संवेदनशीलता, मानसिक स्वास्थ्य, वित्तीय साक्षरता और 21वीं सदी के जरूरी कौशल विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
शाला त्यागी बच्चों को फिर से शिक्षा से जोड़ने में शिक्षकों और यूनिसेफ टीम का महत्वपूर्ण सहयोग रहा। जिला शिक्षा अधिकारी रजनीश तिवारी ने विद्यालय में पुनः प्रवेश लेने वाले बच्चों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी हैं।
जिले में शिक्षा से छूटे हर बच्चे को फिर से स्कूल तक पहुंचाने का यह अभियान लगातार जारी है।









