उम्र नहीं बनी सीखने की राह में बाधा, 78 वर्षीय बुजुर्ग ने भी दी उल्लास महापरीक्षा

उल्लास महापरीक्षा में 5518 नवसाक्षरों ने दिखाया सीखने का जज्बा

270 केंद्रों पर हुआ बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान का मूल्यांकन

उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत रविवार को जिले में उल्लास महापरीक्षा का आयोजन किया गया। जिले के तीनों विकासखंडों की ग्राम पंचायतों और तीनों नगरीय निकायों में बनाए गए 270 परीक्षा केंद्रों पर सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान का मूल्यांकन हुआ। परीक्षा में जिलेभर से 5518 नवसाक्षर शामिल हुए।

परीक्षा के व्यवस्थित संचालन के लिए 270 केंद्राध्यक्ष और 344 पर्यवेक्षक-सहमूल्यांकनकर्ता नियुक्त किए गए थे। जिला एवं विकासखंड स्तर पर कंट्रोल रूम के माध्यम से परीक्षा की निगरानी की गई। जिला शिक्षा अधिकारी रजनीश तिवारी सहित मॉनिटरिंग दलों ने विभिन्न केंद्रों का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया।

 

महापरीक्षा में नवसाक्षरों का उत्साह देखने को मिला। कई केंद्रों पर सास-बहू, पति-पत्नी और देवरानी-जेठानी ने एक साथ परीक्षा दी। 65 वर्षीय दौजी बाई ने अपनी 38 वर्षीय बहू रुक्मणी बाई के साथ परीक्षा में हिस्सा लिया। वहीं बेलपत में 78 वर्षीय प्रेम सिंह और 72 वर्षीय कृपाल सिंह ने भी परीक्षा देकर यह संदेश दिया कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती।

 

कई परीक्षा केंद्रों को आकर्षक ढंग से सजाकर आदर्श परीक्षा केंद्र और सेल्फी जोन बनाए गए। परीक्षार्थियों का तिलक, फूल-माला और गुलदस्ते से स्वागत किया गया। परीक्षा के सफल संचालन में शिक्षा विभाग, डाइट पेंड्रा, स्काउट-गाइड और स्वयंसेवी शिक्षकों सहित विभिन्न टीमों की भूमिका रही। सफल परीक्षार्थियों को एनआईओएस, नई दिल्ली द्वारा प्रमाण-पत्र प्रदान किया जाएगा।

 

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