
मरवाही वन मंडल के गौरेला वन परिक्षेत्र में वन तस्करों ने एक बार फिर वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पीपरखूटी बीट में तस्करों ने एक ही रात में 21 हरे-भरे सागौन के पेड़ों को काट डाला।
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि पेड़ों को काटने के बाद तस्कर पूरी लकड़ी जंगल में ही छोड़कर फरार हो गए। इससे घटना सामान्य लकड़ी चोरी से अलग नजर आ रही है और वन विभाग की हालिया कार्रवाई के बाद बदले की कार्रवाई की आशंका जताई जा रही है।
घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग में हड़कंप मच गया। अधिकारियों के निर्देश पर वन अमला मौके पर पहुंचा तो बड़ी संख्या में सागौन के पेड़ कटे हुए मिले।
बताया जा रहा है कि तस्करों ने सभी 21 पेड़ों को जमीन से करीब तीन से चार फीट ऊपर से काटा। सामान्य तौर पर लकड़ी तस्कर पेड़ को जमीन के काफी करीब से काटकर लकड़ी अपने साथ ले जाते हैं, लेकिन इस मामले में कटाई के बाद लकड़ी वहीं छोड़ दी गई।
पीपरखूटी बीट सागौन और सरई के घने जंगल के लिए जानी जाती है और लंबे समय से यह क्षेत्र अवैध कटाई के लिए तस्करों के निशाने पर रहा है। वहीं, मुख्य मार्ग से महज 50 मीटर अंदर इतनी बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई ने वन विभाग की रात्रि गश्त और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
इस मामले में गौरेला वन परिक्षेत्र अधिकारी ज्योत्सना पांडेय ने बताया कि घटना वन तस्करों पर की गई सख्त कार्रवाई के आक्रोश का परिणाम प्रतीत हो रही है। विभाग को कुछ अहम सुराग मिले हैं और कुछ संदिग्धों की पहचान भी की गई है, जो फिलहाल फरार बताए जा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों को जल्द गिरफ्तार किया जाएगा।
अब बड़ा सवाल यह है कि जंगल की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार वन विभाग की नाक के नीचे एक ही रात में 21 सागौन के पेड़ आखिर कैसे काट दिए गए? इस घटना ने वन विभाग की गश्त और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।









