शिकायत के कई दिन बाद भी कार्रवाई स्पष्ट नहीं, कॉलेज प्रशासन की चुप्पी पर सवाल

जूलॉजी विभाग की HOD के विरुद्ध छात्र की शिकायत पर अब तक स्थिति स्पष्ट नहीं; निष्पक्ष जांच की मांग

पेंड्रा, 18 सितंबर 2026। शासकीय महाविद्यालय, पेंड्रा में एमएससी तृतीय सेमेस्टर के एक छात्र द्वारा जूलॉजी विभाग की HOD के विरुद्ध की गई लिखित शिकायत के मामले में कई दिन बीतने के बाद भी कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट नहीं होने से सवाल उठ रहे हैं।

शिकायतकर्ता छात्र के अनुसार, उसने 7 सितंबर 2026 को महाविद्यालय के प्राचार्य को लिखित शिकायत सौंपकर आरोप लगाया था कि उसकी अनुपस्थिति में कक्षा के दौरान उसके व्यक्तिगत एवं शैक्षणिक जीवन को लेकर कथित रूप से अपमानजनक और हतोत्साहित करने वाली टिप्पणियां की गईं।

छात्र ने शिकायत में मामले की निष्पक्ष जांच, संबंधित विद्यार्थियों के बयान दर्ज करने तथा उपलब्ध साक्ष्यों की जांच की मांग की थी।

शिकायत के बाद जांच कहां तक पहुंची?

शिकायतकर्ता का कहना है कि शिकायत दिए जाने के बाद कई दिन बीत चुके हैं, लेकिन उसे अब तक यह स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है कि मामले में जांच शुरू हुई है या नहीं और यदि शुरू हुई है तो वह किस स्तर तक पहुंची है।

छात्र की ओर से यह भी सवाल उठाया जा रहा है कि क्या संबंधित विद्यार्थियों के बयान लिए गए हैं और क्या मामले से जुड़े संभावित साक्ष्यों को सुरक्षित कर उनकी जांच की जा रही है।

कार्रवाई को लेकर उठ रहे सवाल

शिकायतकर्ता पक्ष का कहना है कि यदि शिकायत जांच योग्य है, तो महाविद्यालय प्रशासन द्वारा मामले की जांच की स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए। हालांकि, HOD के विरुद्ध लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है, इसलिए जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।

कॉलेज प्रशासन से जवाब की अपेक्षा

शिकायतकर्ता ने बताया कि उसने पहले महाविद्यालय स्तर पर ही शिकायत देकर संस्थागत प्रक्रिया के माध्यम से समाधान की उम्मीद की थी। अब तक कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट नहीं होने पर वह जिला प्रशासन और संबंधित उच्च अधिकारियों के समक्ष भी मामला रखने पर विचार कर रहा है।

छात्र का कहना है कि उसका उद्देश्य किसी शिक्षक को व्यक्तिगत रूप से बदनाम करना नहीं, बल्कि निष्पक्ष जांच और सम्मानजनक शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित कराना है।

जिला प्रशासन के हस्तक्षेप की मांग संभव

शिकायतकर्ता के अनुसार, यदि महाविद्यालय स्तर पर मामले में शीघ्र और निष्पक्ष जांच नहीं होती है, तो वह कलेक्टर, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही सहित संबंधित उच्च अधिकारियों के समक्ष शिकायत प्रस्तुत कर स्वतंत्र जांच की मांग कर सकता है।

फिलहाल महाविद्यालय प्रशासन की ओर से मामले पर कोई विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

अब सवाल यह है कि 7 सितंबर को दी गई शिकायत पर जांच की स्थिति क्या है और महाविद्यालय प्रशासन इस संबंध में अपना पक्ष कब स्पष्ट करेगा?

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